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चुनाव प्रचार से विकास का एजेंडा गायब 

गोंदिया नगर परिषद चुनाव-२०२५ : जनता सब जानती है….

गोंदिया : गोंदिया नगर परिषद चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई है। पिछले 6 से 7 वर्षो से चुनाव न होने कारण शहर ही स्थिती बदहाल हो चुकी है। अनेक समस्याओं के कारण जनता परेशान दिखी. ऐसे में बडे नेताओं से शहर की जनता को बहुत उम्म्मीदें थी. परंतु उम्म्मीदों पर नेता असफल होते हुए दिखाई दिए. खराब रस्ते, नालीओं की समस्या, कचरा प्रबंधन को लेकर निर्माण हुई अव्यवस्था, अतिक्रमण की बढती समस्याओं ने गोंदिया शहर में अनेक प्रश्न निर्माण किए, जिसका समाधान कोई भी नेता कर न सका. ऐसे में चुनाव तारीखों का घोषना हुई. सभी पार्टीयां तैयारी में लग कर एक-दुसरे की कमियांं उजागर कर रही है। लेकिन, वास्तव में सत्ता होकर आपने क्या किया, यह सवाल भी जनता की ओर से पुछा जा रहा है और इसका जबाब भी नेता और उनके लाडले उम्ममीदवारों को देना पड़ेगा. अभी चुनाव प्रचार जोरो पर है। पर प्रचार में विकास का एजेंडा गायब दिख रहा हैं। ऐसे में मतदाता उम्मीदवार के वादों पर भरोसा कैसे करें, इस दुविधा में दिखाई दे रहे है।

आरक्षण को लेकर निर्माण हुई स्थिती के कारण कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद चुनाव प्रक्रिया बाधित हो गई थी. जिस कारण गोंदिया नगर परिषद में प्रशासक राज था. प्रशासक राज के कारण गोंदिया शहर समस्याओं का केंद्र बनकर उभरा. मूलभूत सुविधाओं के लिए जनता संघर्ष करती दिखाई दी. प्रभागों में समस्या सुनने वाला कोई न था. इस कारण शहर के नागरिक बेहाल दिखे।  प्रशासक राज के कारण अपनी समस्या किसे कहे, इस सवाल साथ जनता ने एक-एक दिन गुजारे. वही अब चुनाव आयोग ने चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। जिस कारण चुनाव लडने के इच्छुक उत्साहीत दिख रहे, स्वयंघोषित नेता अपना पक्ष जनता के सामने रखते हुए दिखाई दे रहे है। किंतु जनता सब जानती है…विगत कुछ वर्षो में जो हुआ उसका हिसाब अब लिया जाएगा। कोई कितनी भी बढाई मारले और अपनी पार्टी एंव अपनी छवी बनाने की कोशिक करे। जनता तक पहुंचने पर किसने क्या काम किया, कोनते नेता ने शहर  को विकास के नाम पर क्या दिया, इसका हिसाब भी देना पड़ेगा। चुनाव आते ही नेतागिरी में व्यस्त नेताओं ने गोंदिया शहर के लिए क्या किया यह आगामी २ दिसंबर को होनेवाले चुनाव और ३ दिसंबर घोषित चुनाव नतीजे के बाद दिखाई देगा।

चुनाव प्रचार का बिगुल बजते ही जनप्रतिनिधि अपने पार्टी के उम्मीदवार के प्रचार हेतु चुनावी मैदान में जान फूंक रहे है। तो उम्मीदवार भी अपने आप को साबित करने में धूमधाम से प्रचार कर रहे है। इन सबके बीच शहर विकास का एजेंडा गायब है। हमने किया है और हम करेंगे यही सुनाई दे रहा हैं। किन्तु कितना विकास हुआ है, यह दिखाई दे रहा हैं, शहर की समस्याओं को लेकर जनता काफी परेशान है, ऐसे में चुनावी वादे पर यकीन करना मतदाता के लिए आसान नहीं होगा.

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गोंदिया गड्ढो का शहर

जिले का केंद्र होने के कारण गोंदिया शहर को महत्व प्राप्त आहे. बडे बाजार के रूप में भी गोंदिया परिसर मे प्रख्यात है। एैसे में यहां के नागरिकों सुविधाए उपलब्ध कराने के जिम्मेदारी नगर परिषद की है। लेकिन जिले की सबसे बडी नगर परिषद होने के बावजूद गोंदिया नगर परिषद की लचर कार्यप्रणाली जनता के लिए हमेशा सिरदर्द का कारण बनती रही है। आज शहर का एक भी मार्ग अच्छी स्थिति में नजर नही आता। सडके गड्ढो से पटी पडी हुई है। भुमिगत गटर लाईन शहर वासीयों के लिए वरदान कम और श्राप ज्यादा साबित हुई। गड्ढो के कारण नागरिकों का सडकों पर चलना मुश्किल हो गया। माल कमाने के चलते अच्छी सडक दोबारा खोदकर इनकी दुर्दशा की गई. इस काम में अधिकारी एंव स्वयंघोषित नेता आगे दिखाई दिए. उनका जनसमस्या से कोई लेना देना नही था. इसी कारण आज गोंदिया गड्ढो का शहर कहकर पहचाना जा रहा है। 

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तो फिर जनता उम्मीद किससे करे…..

दो दशक पहले कांग्रेस के एक दिग्गज नेता ने गोंदिया शहर को नंबर-१ करने का नारा दिया था। उस समय सत्ता भी कांग्रेस पार्टी की थी. इस नारे को लेकर जमकर राजनीति की गई. उसके बाद राज्य के साथ-साथ गोंदिया में भी सत्ता परिवर्तन हुआ. नेतृत्व की चाबी अब भाजपा के हाथ में थी. अब गोंदिया शहर को विकास होगा इस आशा से साथ जनता ने भी बहुत उम्मीद पाल रखी थी. लेकिन, कुछ समय में नेताओं के दावों की हवा निकल गई और गोंदिया शहर की स्थिती में सुधार होने के बजाए स्थिती और भी बदतर होते गई. जिस उम्मीद के साथ जनता ने नेतृत्व का मौका दिया, उसका क्या हुआ? यह प्रश्न अब भी कायम है। अब फिर वही नारे के साथ चुनाव में इच्छूक उम्मीदवार और नेताओं के लाडले कार्यकर्ता अपने आप को चमकाने में लगे है। लेकिन जनता किस पर भरोसा करे, यह प्रश्न भी अब चर्चा का विषय बन चुका है।

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