नवेझरी उपकेंद्र (PHC) जर्जर; किसी भी क्षण दुर्घटना होने का खतरा
प्रशासन ने तत्काल कदम उठाने की प्रहार की मांग
तिरोड़ा : तहसील के अंतर्गत आने वाला नवेजरी गांव विचारक आचार्य विनोबा भावे की विचारधारा पर चलने वाला गांव माना जाता है। इस गांव ने ग्राममंडल स्थापित कर बीस वर्षों तक श्रमदान कर आत्मनिर्भर गांव खड़ा करने का आदर्श प्रस्तुत किया। गांव ने शासनस्तरीय विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर जिला स्तर पर थोड़ी-बहुत पहचान भी बनाई। इसके बावजूद राजनीतिक कलह और अधिकारियों की उपेक्षा के कारण गांव विकास से वंचित रह गया है।नवेझरी गांव नागझिरा अभयारण्य की सीमा के पास स्थित है और यह आदिवासी बहुल गांव है। इस क्षेत्र का प्रमुख बाज़ार होने से नवेझरी में हमेशा चहल-पहल रहती है। तहसील मुख्यालय जाने के लिए नागरिकों की पहली पायरी नवेझरी बस स्टैंड है। इसलिए इस गांव का महत्व और भी बढ़ जाता है।गांव का प्राथमिक स्वास्थ्य उपकेंद्र (PHC) कभी आसपास के पांच से छह गांवों के लिए जीवनदायी साबित हुआ था। महिलाएं, वृद्ध, आदिवासी, ज़रूरतमंद रोगी उपचार के लिए यहां आया करते थे। खास बात यह कि इस उपकेंद्र में पहले महिलाओं की प्रसूति सुरक्षित रूप से की जाती थी। महीने में उल्लेखनीय संख्या में डिलीवरी होती थी और एक समय तो इस उपकेंद्र ने सबसे अधिक बच्चों के जन्म का रिकार्ड भी बनाया था। इस कारण नवेझरी उपकेंद्र की पहचान महिला स्वास्थ्य के लिए आदर्श केंद्र के रूप में थी।लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। (PHC) उपकेंद्र की इमारत जर्जर अवस्था में है, दीवारों में दरारें पड़ी हैं। छत टपकती है, प्लास्टर झड़ चुका है। कभी भी दीवार गिरकर दुर्घटना हो सकती है, ऐसी आशंका नागरिक व्यक्त कर रहे हैं। रोगियों के लिए यहां आकर इलाज कराना जोखिम भरा हो गया है। इसके बावजूद कोई विकल्प न होने से लोग मजबूरी में इस खतरनाक इमारत में इलाज कराने आते हैं। ग्राममंडल के रूप में नवेझरी ने अलग प्रयोग किए। ग्रामीणों ने श्रमदान कर गांव खड़ा किया। लेकिन पिछले दो साल से प्रशासन गांव की ओर पूरी तरह उदासीन है। इस अवधि में एक भी विकास कार्य नहीं हुआ। इससे पहले भी कई बार नए उपकेंद्र (PHC) की इमारत की मांग की गई, परंतु यह मांग फाइलों में ही दबा दी गई।इसी बीच अवैध राख और रेत का परिवहन करने वाले भारी वाहनों से सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। अदानी कंपनी से संबंधित परिवहन इस मार्ग से बढ़ने के कारण ग्रामीण त्रस्त हैं। साथ ही कही वर्ष पहले बनी उपकेंद्र की इमारत अब पूरी तरह जीर्ण हो चुकी है। इसके बावजूद शासन और स्थानीय प्रशासन इस गंभीर समस्या पर आंखें मूंदे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस जीर्ण-शीर्ण इमारत में इलाज जारी रखना मृत्यु को आमंत्रण देने जैसा है। उपकेंद्र (PHC) में महिलाएं, छोटे बच्चे और वृद्ध बड़ी संख्या में आते हैं। यदि छत गिर गई या दीवार ढह गई तो बड़ी जनहानि हो सकती है। इसलिए जिला प्रशासन ने इस पर गंभीरता से ध्यान देकर तत्काल नई इमारत का प्रस्ताव मंजूर करना आवश्यक है।
नवेजरी सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने बार-बार प्रशासन को निवेदन दिया। फिर भी कोई हलचल दिखाई नहीं देती। इससे ग्रामीणों में आक्रोश का माहौल है।“यदि जिला नियोजन समिति की बैठक में नए उपकेंद्र की इमारत का प्रस्ताव मंजूर नहीं हुआ, तो प्रहार संगठन और ग्रामीण उग्र आंदोलन छेड़ेंगे। दुर्घटना होने के बाद जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने वाले अधिकारियों को इस बार नागरिक माफ नहीं करेंगे।”
— महेंद्र भांडारकर,जिला अध्यक्ष, प्रहार संगठन, नवेझरी

