Maharashtra winter Session 2025 : धान किसानों को 20 हजार बोनस, इस्पात कारखाना, 50 हजार आवास की मांग
गोंदिया के जनता के आमदार विनोद अग्रवाल ने विधानसभा में किया जोरदार ध्यानाकर्षण
नागपुर :
महाराष्ट्र विधानसभा के शीतकालीन सत्र (Maharashtra winter Session 2025) में शुक्रवार को गोंदिया के विधायक विनोद अग्रवाल ने सदन में एक के बाद एक मुद्दे पेश कर ध्यानाकर्षण सूचनाएं दी एवं क्षेत्र की जनता की प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखीं. श्री अग्रवाल ने सबसे पहले धान उत्पादक किसानों के लिए प्रति हेक्टर 20 हजार रुपए बोनस देने की मांग की. उन्होंने कहा कि गोंदिया धान का कटोरा है, लेकिन किसानों को लागत भी नहीं मिल पा रही. बेमौसम वर्षा एवं अतिवृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई देने हेतु विधायक विनोद अग्रवाल ने सरकार के प्रति आभार भी व्यक्त किए. इसके साथ ही जंगली जानवरों से फसल बचाने के लिए 100 प्रतिशत सरकारी अनुदान पर ‘खेत कंपाउंड योजना’ शुरू करने का आग्रह किया. विधायक ने गोंदिया जिले में शासकीय कृषि महाविद्यालय और शासकीय अभियांत्रिकी महाविद्यालय शुरू करने तथा बेरोजगारी रोकने के लिए गड़चिरौली की तर्ज पर बड़े इस्पात कारखाने लगाने की मांग रखी.
उन्होंने कहा, (Maharashtra winter Session 2025) “हमारे युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हैं. स्थानीय स्तर पर ही बड़े उद्योग लगें तो पलायन रुकेगा.” शहर की झोपड़पट्टी, जंगल-आबादी और नजूल की जमीन पर रह रहे हजारों परिवारों को पट्टे देने, जिला परिषद स्कूलों में रिक्त शिक्षक पदों पर तुरंत भर्ती करने तथा गोंदिया शहर के कचरे के स्थायी निपटारे के लिए ठोस कदम उठाने की मांग भी की गई. आंगनवाड़ी, आशा वर्कर, उमेद कर्मचारी, समग्र शिक्षा अभियान कर्मचारी, सीआरपी भगिनी, कोतवाल समेत सभी आंदोलनरत कर्मचारियों की जायज मांगें तुरंत मानने की अपील करते हुए श्री अग्रवाल ने कहा कि ये सभी कर्मचारी समाज की सेवा कर रहे हैं, इनकी मांगों को अनदेखा नहीं किया जा सकता. (Maharashtra winter Session 2025) ओबीसी, आदिवासी और अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पहले से चिह्नित जगहों पर वसतिगृहों का निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गोंदिया शहर में 10 हजार और ग्रामीण क्षेत्र में 40 हजार अतिरिक्त मकान स्वीकृत करने की मांग भी सदन में गूंजी. सदन में अपनी बात रखते हुए विधायक विनोद अग्रवाल ने कहा, “ये मांगें कोई नई नहीं हैं. जनता वर्षों से इन्हें उठा रही है। अब समय आ गया है कि सरकार इन्हें प्राथमिकता दे”

