Road repair : ग्रामीणों ने भरे सड़क के गड्ढे; अनशन की चेतावनी
प्रशासन के खिलाफ आक्रोश : हो रही थीं दुर्घटनाएं
वाहन चालकों को करना पड़ रहा था परेशानी का सामना
आमगांव : गांव की समस्याओं के प्रति प्रशासन की लापरवाही व उदासीनता एक बार फिर उजागर हुई है. तहसील के शिवनी गांव के नागरिकों को आखिरकार स्वयं ही अपनी मुख्य सड़क की मरम्मत (road repair) करनी पड़ी. गहरे गड्डों से पट चुकी सड़क पर महीनों से चल रही परेशानी को नजरअंदाज किए जाने के बाद ग्रामीणों ने एकजुट होकर श्रमदान और जनसहयोग से (road repair) गड्ढे भर दिए, यह कदम न केवल प्रशासन को आईना दिखाने वाला है बल्कि ग्रामवासियों की एकता का भी आदर्श उदाहरण है.
शिवनी गांव की मुख्य सड़क लंबे समय से गड्डों में तब्दील हो चुकी थी. इन गड्डों के कारण नागरिकों और वाहन चालकों को आए दिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. आए दिन दुर्घटनाएं हो रही थीं, जिससे लोगों की जान तक जोखिम में पड़ रही थी. स्कूली छात्रों, किसानों और मजदूरों को अपने रोजमर्रा के आवागमन में खासी दिक्कतें उठानी पड़ रही थीं. ग्रामीणों ने सार्वजनिक लोकनिर्माण विभाग सहित संबंधित सरकारी एजेंसियों को कई बार पत्राचार और शिकायतें भेजीं. लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी. अधिकारियों ने समस्या को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया. आखिरकार, जब कोई उपाय नजर नहीं आया, तो ग्रामीणों ने स्वयं पहल करने का निर्णय लिया. शिवनी गांव का यह आंदोलन एक बड़ा संदेश देता है कि प्रशासनिक लापरवाही जब हद से बढ़ जाती है, तब जनता खुद ही समाधान निकालने को मजबूर हो जाती है. लेकिन यह भी स्पष्ट है कि जनता अपने करों का उपयोग सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए चाहती है, न कि हर बार समस्याओं का बोझ स्वयं उठाने के लिए.
रविवार को सुबह से ही ग्रामीण सड़क सुधार कार्य में जुट गए. बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और समाजसेवी एक साथ आए. चंदे से बजरी, मिट्टी और गिट्टी खरीदी गई. ग्रामीणों ने दिनभर श्रमदान कर (road repair) गड्डों को भर दिया. इस कार्य में कई परिवारों ने पानी, चाय और नाश्ता उपलब्ध कराकर योगदान दिया. इस एकजुटता ने गांव में श्रमदान संस्कृति का आदर्श स्थापित किया और यह संदेश दिया कि अगर जनता ठान ले तो कठिन से कठिन समस्या का हल संभव है.
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स्थायी समाधान करें
ग्रामीणों की एकजुटता से समस्या का अस्थायी समाधान जरूर हो गया है, लेकिन वे सरकार से स्थायी और टिकाऊ मरम्मत की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो सभी ग्रामीण आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर होंगे.
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नहर के पुल पर भी मंडरा रहा खतरा
ग्रामीणों की चिंता केवल सड़क तक ही सीमित नहीं है. बाग सिंचाई प्रबंधन उपविभाग के अधीन शिवनी के पास स्थित नहर का पुल जर्जर और संकरा हो चुका है. कभी भी इसके गिरने की आशंका जताई जा रही है. साथ ही, किंडगीपार से इंदिरा नगर-शिवनी मार्ग की हालत इतनी खराब है कि वहां सड़क में गड्डा है या गड्डों में सड़क, यह कहना मुश्किल हो जाता है.
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ओवरलोडेड ट्रकों से खराब हो रही सड़क
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस सड़क पर लगातार भारी ट्रक चलते हैं, जिससे सड़क बार-बार खराब होती है. साथ ही ट्रक मालिक ग्रामीणों को धमकाते भी हैं. ग्रामीणों का मानना है कि अधिकारियों और ट्रक मालिकों की मिलीभगत के कारण समस्या का समाधान नहीं हो रहा है.

