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Gondia mashal yatra: विहिप व बजरंग दल की भव्य मशाल यात्रा

अखंड भारत संकल्प दिवस एवं विश्व हिंदू परिषद स्थापना दिवस

गोंदिया : विश्व हिंदू परिषद – बजरंग दल मातृशक्ती – दुर्गावाहिणी गोंदिया द्वारा अखंड भारत संकल्प दिवस एवं विश्व हिंदू परिषद स्थापना दिवस के पावन अवसर पर आज सायंकाल के उपरांत गोंदिया नगर में भव्य मशाल यात्रा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता पूजन, ओमकार जाप तथा जय श्रीराम के गगनभेदी नारों के साथ हुआ। मशाल यात्रा में सैकड़ों बजरंग दल के कार्यकर्ताओं, मातृशक्ती दुर्गावाहिनी के बहणो ने हाथों में जलती मशालें, भगवा ध्वज और देशभक्ति से ओत-प्रोत नारों के साथ उत्साहपूर्वक भाग लिया।

मशाल यात्रा का प्रारंभ विश्व हिंदू परिषद जिला कार्यालय से हुआ, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए नेहरू चौक पर संपन्न हुई। यात्रा के दौरान भारत की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक गौरव का संदेश जन-जन तक पहुँचाया गया । इस अवसर पर प्रमुख वक्ता विदर्भ प्रांत बजरंग दल संयोजक नवीन जैन ने कहा कि 14 अगस्त 1947 को हुए देश के दुर्भाग्यपूर्ण विभाजन के इतिहास को स्मरण करते हुए वक्ता ने कहा कि अखंड भारत केवल भौगोलिक एकता का प्रतीक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और भावनात्मक एकता का प्रतीक है। विभाजन से उत्पन्न त्रासदी और लाखों लोगों के बलिदान को याद करते हुए यह दिवस हमें राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव बनाए रखने की प्रेरणा देता है।इस अवसर पर युवा पीढ़ी को जागरूक करने हेतु देशभक्ति गीत, प्रेरणादायी वक्तव्य और संकल्प सभाएं आयोजित की गईं।

वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि अखंड भारत की परिकल्पना में पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका सहित वे सभी क्षेत्र सम्मिलित हैं, जो प्राचीन समय में भारत की सांस्कृतिक धारा से जुड़े थे।अखंड भारत का सपना केवल एक राजनीतिक संकल्प नहीं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान का प्रतीक है। 1964 को कृष्ण जन्माष्टमी के दिन मुंबई के सांधीपनी आश्रम में पूज्यनिय संतो के उपस्थिती में स्थापित विश्व हिंदू परिषद का मूल उद्देश्य हिंदू समाज की सेवा, सुरक्षा और जागरण है। परिषद ने धर्म रक्षा, गौ संवर्धन, सेवा कार्य, मंदिर संरक्षण, शिक्षा, पर्यावरण और राष्ट्रीय एकता जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के इतिहास में 1990 का वर्ष अमर बलिदानों का वर्ष है। इन्हीं बलिदानियों में राजस्थान, जयपुर के दो वीर सपूत राम कोठारी और शरद कोठारी का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर रामलला के धाम पर पहली बार भगवा ध्वज फहराने का इतिहास रचा। 30 अक्टूबर 1990 को, कारसेवा के आह्वान पर देशभर से रामभक्त अयोध्या पहुँचे। भारी पुलिस बंदोबस्त, कर्फ्यू और गोलीबारी के बीच कोठारी बंधु भीड़ को चीरते हुए विवादित ढाँचे के शीर्ष पर पहुँचे। वहाँ उन्होंने भगवा पताका और “जय श्रीराम” का ध्वज फहराकर लाखों रामभक्तों में उत्साह का संचार किया। लेकिन यह साहसिक कार्य उनके जीवन का अंतिम नहीं, बल्कि अमरता का आरंभ था। 2 नवम्बर 1990 को, उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर निर्ममता से गोली मार दी। प्रशासन ने इसे “मुठभेड़” बताया, परंतु सैकड़ों कारसेवकों के अनुसार यह सीधी हिरासत में हत्या थी।आज, कोठारी बंधु का बलिदान केवल राजस्थान या अयोध्या का नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का गर्व है। उनका साहस हमें यह सिखाता है कि आस्था और सत्य के लिए दिया गया बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता।विश्व हिंदू परिषद एवं समस्त हिंदू समाज उनके बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित करता है और संकल्प लेता है कि जिस ध्येय के लिए उन्होंने प्राण दिए, उस भव्य श्रीराम मंदिर के निर्माण और सनातन संस्कृति के संरक्षण हेतु सदैव समर्पित रहेंगे।वक्ता ने कहा कि विहिप विश्वभर के हिंदुओं को एक सूत्र में बांधने वाला सशक्त सांस्कृतिक संगठन है, जो “सेवा, सुरक्षा, संस्कार” के तीन स्तंभों पर आधारित है। उन्होंने बजरंग दल कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि समाज में सेवा, समरसता और संगठन के माध्यम से राष्ट्र की अखंडता को मजबूत करें .कार्यक्रम का सफल मंचसंचलन डॉ. सुनील कोहड़े जिला सहमंत्री कार्यक्रम की प्रस्तावना मुकेश उपराडे जिला मंत्री द्वारा किया गया एवं संगठन गीत दिलीप रक्से नगर सहमंत्री द्वारा लिया गया. प्रमुख वक्ता के रूप में नवीन जैन (प्रांत संयोजक, बजरंग दल, विदर्भ) उपस्थित थे. इस कार्यक्रम मे प्रमुख अतिथि के रूप में देवेश मिश्रा प्रान्त सहमंत्री, भीकम शर्मा जिला अध्यक्ष, वंदना पाठक जिला उपाध्यक्ष, मनोज पारेख जिला उपाध्यक्ष, प्रमोद कोठारी नगर अध्यक्ष, प्रदीप ठाकरे उत्तर प्रखंड अध्यक्ष उपस्थित थे. इस कार्यक्रम को सफल करने हेतु संजय दुबे, हरीश अग्रवाल, महेंद्र देशमुख, सुभाष पटले, अंकित कुलकर्णी, हार्दिक जीवानी, अनुप शुक्ला, मनीष बोपचे, राजू लारोकर, प्रमोद शहारे, भोला कोकाटे, उमेश डहारे, अभिमन्यू चतरे, अशोक हेमने, विठ्ठल कोठेवार, संजय मते, जितेंद्रसिंह राणा, भूपेंद्र श्रीवास, सुदेश चव्हाण, अनिल तिवारी, अनिल सदन, जनार्दन जामवंत, मुकेश हरीणखेडे, मुकेश खामले, रवी भंडारी, आशिष कटरे, सागर परिहार, ओम काळे, शिव हटेल, पीयूष रक्सेल, अथर्व भारद्वाज, रोहित सोनवाणे, गोपाल शर्मा, कोमल रहांगडाले, महेंद्र रहांगडाले, प्रकाश पटले, सुजीत कटरे, संजू पटेल, रामदेव मिश्रा, सचिन चौरसिया, लवकेश मिश्रा, विशाल शुक्ला, भूषण गिऱ्हे, रवींद्र हत्तीमारे, अजय यादव, राहुल स्वामी, राजेश चौहान, संजय बैतूल, दिनेश द्विवेदी, अबलू पांडे, गुरुमुख उदवानी, लेखराज डोमले, संजय जैन, नितिन जिंदल, अनिल बिसेन, योगेंद्र सोलंकी, सुनील तिवारी, बंटी मिश्रा, भारत शुक्ला, बन्नी कनोजिया, अमित झा, रजनीश जायसवाल, समरित नशीने मातृशक्ति दुर्गावाहिनी में रीता अरोरा, स्नेहल इटानकर, अल्का शुक्ला, सुषमा यदुवंशी, मनीषा कटरे, नीलिमा सोलंकी, पलक सोनवाने, गीता सोनवाने, रंजना कुलकर्णी, मनिषा नेवारे, संगीता रोकडे, छाया उके, पायल मिश्रा, ममता कनोजिया, सिद्धी मिश्रा एवं सभी कार्यकर्ताओं ने अथक प्रयास किया.

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