नीट परीक्षा रद्द: सरकार देश से माफी मांगे, शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें और NTA बर्खास्त हो – सांसद डॉ. प्रशांत पडोले
विद्यार्थियों के मानसिक संताप और आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा? भंडारा-गोंदिया सांसद का केंद्र सरकार से तीखा सवाल
भंडारा/गोंदिया : देशभर में बहुचर्चित नीट (NEET) परीक्षा का पेपर लीक मामला सामने आने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा परीक्षा रद्द किए जाने पर भंडारा-गोंदिया लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. प्रशांत पडोले ने केंद्र सरकार और एनटीए पर तीखा प्रहार किया है। पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से उजागर हुई प्रशासनिक विफलता पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सांसद डॉ. पडोले ने मांग की है कि केंद्र सरकार विद्यार्थियों और अभिभावकों से सार्वजनिक माफी मांगे, केंद्रीय शिक्षा मंत्री तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाए।
सांसद डॉ. पडोले ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर केंद्र सरकार से सवाल किया है कि वर्षों की कड़ी मेहनत, मानसिक तनाव और आर्थिक बोझ सहकर तैयारी करने वाले लाखों विद्यार्थियों के साथ जो अन्याय हुआ है, उसकी प्रतिपूर्ति केवल परीक्षा को दोबारा आयोजित करने से नहीं हो सकती। उन्होंने पूछा कि इस पूरे घटनाक्रम से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को जिस मानसिक पीड़ा, असुरक्षा और तनाव का सामना करना पड़ा है, उसकी भरपाई सरकार किस प्रकार करेगी?
अभिभावकों ने उठाया आर्थिक और शारीरिक कष्ट
डॉ. पडोले ने विद्यार्थियों के परीक्षा केंद्रों की अव्यवस्था पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के अनेक विद्यार्थियों के परीक्षा केंद्र उनके गृह जिले या शहर से कई किलोमीटर दूर बनाए गए थे। उन्होंने बताया कि वे व्यक्तिगत रूप से ऐसे कई अभिभावकों को जानते हैं जिन्होंने अपने बच्चों की सुविधा के लिए दफ्तरों से छुट्टियां लीं और अपने व्यवसाय व दुकानें बंद रखीं। चिलचिलाती धूप में परीक्षा केंद्रों के बाहर घंटों खड़े रहकर अभिभावकों ने अपने बच्चों का इंतजार किया, लेकिन प्रशासन की ओर से उनके लिए पीने के पानी तक की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी।
पुनः परीक्षा का आर्थिक बोझ कौन उठाएगा?
सांसद ने सरकार से सीधा सवाल किया कि परीक्षा के लिए दूरदराज के केंद्रों तक पहुंचने में विद्यार्थियों और उनके परिवारों को यात्रा, होटल, भोजन तथा अन्य व्यवस्थाओं पर भारी खर्च करना पड़ा। अब जब परीक्षा रद्द कर दी गई है और इसे पुनः आयोजित किया जाएगा, तो इस अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कौन वहन करेगा? क्या केंद्र सरकार इन विद्यार्थियों और अभिभावकों को उनके खर्चों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करेगी?
नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए हो कार्रवाई
यह देश के युवाओं के भविष्य और उनके विश्वास से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील और गंभीर विषय है। सांसद डॉ. पडोले ने स्पष्ट किया कि इस मामले में सरकार को अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा व्यवस्था में हुई इस शर्मनाक विफलता की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अविलंब अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
अंत में उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि देश के युवाओं का भविष्य किसी भी प्रकार की सरकारी लापरवाही, भ्रष्टाचार या प्रशासनिक अव्यवस्था की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। केंद्र सरकार को तत्काल एक पारदर्शी, जवाबदेह और छात्रहितैषी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।

