gosikhurd irrigation project : मांगों पर निर्णय न होने पर परियोजना पीड़ितों ने जलसमाधि की चेतावनी दी
गोसीखुर्द परियोजना 38 वर्ष के बाद भी अधूरी
भंडारा : पूर्व विदर्भ को सुजलाम सुफलाम बनाने के उद्देश्य से 22 अप्रैल 1988 को 372 करोड़ रुपये की लागत से गोसीखुर्द परियोजना की योजना तैयार की गई थी. परियोजना के प्रमुख उद्देश्य 2.56 लाख हेक्टर क्षेत्र की सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन, उद्योगों को जलापूर्ति तथा पेयजल समस्या का समाधान करना था. लेकिन 38 वर्षों में लागत 69 गुना बढ़कर 22 अप्रैल 2025 तक 25,972.86 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि gosikhurd irrigation project परियोजना अभी भी अधूरी है.
पूर्ण होने में और कितना समय लगेगा, इसका अनुमान लगाना भी कठिन है. अत्याधिक खर्च के बावजूद परियोजना से वर्तमान में केवल 14% सिंचाई ही हो रही है. वहीं वर्षा ऋतु में 60 टीएमसी पानी समुद्र में बह जाता है. इसी अपव्यय को रोकने के नाम पर राज्य सरकार ने 20 अगस्त 2024 को 88,000 करोड़ रुपये की वैनगंगा नलगंगा नदीजोड़ परियोजना की घोषणा की है. परंतु प्रश्न यह है कि जब गोसीखुर्द परियोजना 69 गुना बजट और 38 वर्ष लेकर भी अपेक्षित सिंचाई नहीं कर पाई, तो 432 किलोमीटर लंबी नहर बनाकर बुलढाना जिले में नलगंगा नदी तक पानी पहुंचाना कैसे संभव होगा? इसके अलावा, यदि गोसीखुर्द का पानी नलगंगा में मोड़ा जाएगा तो नलगंगा क्षेत्र की अतिवृष्टि का पानी कहां मोड़ा जाएगा, gosikhurd irrigation project यह भी बड़ा तकनीकी प्रश्न है. परियोजना पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि शासन और भ्रष्ट राजनेताओं की मिलिभगत से परियोजना जानबूझकर लटकाई जा रही है. उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भंडारा जिलाधिकारी के माध्यम से निवेदन भेजकर शीत अधिवेशन में लंबित समस्याओं का समाधान करने की मांग की है.
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पीड़ितों की ये हैं प्रमुख मांगें
निवेदन में पीड़ितों ने चेतावनी दी है कि यदि 12 दिसंबर तक हमारी मांगों पर उचित आर्थिक प्रावधानों सहित शासन निर्णय नहीं हुआ, तो हम सभी धर्मों के परियोजना पीड़ित अपने-अपने धर्मानुसार विधि विधान से जलसमाधि लेंगे, परियोजना पीड़ितों की प्रमुख मांगों में कृषि भूमि और घरों के लिए बढ़ी हुई मुआवजा राशि, विभक्त परिवारों को एकमुश्त रकम और घर निर्माण अनुदान, रोजगार के लिए बिना ब्याज का ऋण, पूर्ण जलभराव से प्रभावित गांवों और कृषि भूमि का अधिग्रहण नए कानून से करना, नए गांवठाण में सभी 18 नागरी सुविधाओं की पूर्ति पुनर्वसित परिवारों को 3 किलोवॉट के मुफ्त सोलर पैनल देना, परियोजना पीड़ित प्रमाणपत्र का पुनः निर्गमन व हस्तांतरण प्रक्रिया आसान करना, करचखेड़ा-नेरला-खापरी-रुयाड गांवों का पुनर्वसन की मांग की गई है. इसके लिए 9,000 करोड़ रुपये का आर्थिक प्रावधान किया गया है.
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निर्णायक हस्तक्षेप जरूरी
पीड़ितों का कहना है कि महाराष्ट्र की राजनीति और निर्णय प्रक्रिया नागपुर के मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री और केंद्रीय मंत्रियों की भूमिका के बिना पूर्ण नहीं होती, इसलिए इस मुद्दे पर निर्णायक हस्तक्षेप आवश्यक है. चेतावनी देने वालों में भाऊ कातोरे, दिलीप मडामे, अभिषेक लेंडे, आरजू मेश्राम, कृष्णा केवट, अतुल राघोतें, प्रमिला शहारे, मनिषा भांडारकर, यशवंत टिचकुले और एजाज अली सैयद शामिल है. इन परियोजना पीड़ितों ने जलसमाधि की गंभीर चेतावनी दी है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शासन-प्रशासन इस गंभीर चेतावनी का समाधान कैसे करता है. परियोजना पीड़ितों, क्षेत्रीय नागरिकों और विशेषज्ञों की निगाहें सरकार की आगामी कार्रवाइयों पर टिकी हैं.

